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सब्जी बेचकर गरीबों के लिए अस्पताल बनवाने वाली सुभाषिनी को पद्म सम्मान

देश आज 69वां गणतंत्र दिवस मना रहा है. इस अवसर पर देश भर में जगह-जगह कई कार्यक्रम आयोजित किये गए हैं. दिल्ली, लखनऊ, पटना, मुंबई, चेन्नई और जयपुर में भी कई कार्यक्रम और परेड का आयोजन किया गया है जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे हैं. आज का खास आकर्षण दिल्ली के जनपथ पर होने वाली सैन्य परेड है जहाँ देश विश्व को अपनी ताकत से रूबरू कराएगा और साथ ही विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक झांकियों की एक झलक भी देखने को मिलेगी. देश के 69वें गणतंत्र दिवस के मौके पर सरकार की ओर से पद्म अवॉर्ड्स के नामों का एलान कर दिया है.

इस साल केंद्र सरकार की ओर से कुल 85 लोगों को अपने क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान देने के लिए पद्म सम्मान से नवाजा जाएगा. इन 85 लोगों में 3 लोगों को पद्म विभूषण, 9 लोगों को पद्म भूषण और 73 लोगों को पद्म श्री पुरस्कार दिया जाएगा.

सुभाषिनी मिस्त्री के लिए सम्मान है बहुत खास

सब्जी बेचने वाली एक महिला क्या किसी अस्पताल की मालकिन हो सकती है? ये सवाल नामुमकिन की तरफ इशारा करता है, लेकिन पश्चिम बंगाल की सुभाषिनी ने ऐसे नामुमकिन को सच कर दिखाया है. आज वो ह्यूमैनिटी हॉस्पिटल की मालकिन हैं और खास बात ये है कि यहां गरीबों का पांच रुपए में इलाज होता है.

सभी पद्म सम्मान में सबसे अलग कहानी पश्चिम बंगाल की सुभाषिनी की है. सुभाषिनी दूसरे के घरों में काम करती थी, वो मजदूरी करती थी और जब सुभाषिनी 12 साल की थी तब उनकी शादी हो गयी थी. गरीब परिवार में शादी होने का कारण ये भी था कि उनके पति भी मजदूरी करते थे. दिन गुजरता जा रहा था, और करीब शादी के 10 साल बाद पति बीमार हो गए. सुभाषिनी ने अपने पति को बिना इलाज मरते देखा है. इस हादसे ने उनको एकदम बदल दिया.

सब्जी बेचकर किया अपना गुजारा

तब 23 साल की सुभाषिनी ने तय किया कि वह कुछ ऐसा करेगी कि उसका कोई अपना इस तरह न बिछड़ सके. उसने दिन में मजदूरी और रात में घर का काम कर पैसा जुटाने लगी. उन्होंने बेटे को पढ़ने के लिये अनाथालय भेज दिया. 25 साल में तिनका तिनका जोड़ 25 बेड का अस्पताल बना दिया. कड़ी मेहनत के बाद उनका बेटा भी डॉक्टर बन गया. अब दोनों उसी अस्पताल में मुफ्त इलाज करते हैं गरीबों का और इसकी ख़ुशी सुभाषिनी के चेहरे पर दिखी. पति को मरता देख जो कुछ भी उन्होंने झेला, उसके बाद अब वो चाहती है कोई न देखे. उसकी जिद और संघर्ष की यह सफर बेमिसाल है. सब्जी बेंचने से लेकर एक अस्पताल की मालकिन बनने तक का जीवन आज लाखों लोगों के लिए उदाहरण है.

साल 2018 इस पुरस्कार के लिए 15,700 लोगों ने आवेदन किया था. राज्य सरकार, केंद्र शासित प्रदेश, मंत्रालय, भारत सरकार के विभाग, मुख्यमंत्री, राज्य के राज्यपाल और संसद के सदस्य भी नामों के लिए सिफारिश कर सकते हैं. पिछले साल 89 लोगों को पद्म पुरस्कार दिया गया था.

धोनी , शारदा सिन्हा, पंकज अडवाणी को भी सम्मानित किया जायेगा:

पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और बिलियर्ड्स में शानदार प्रदर्शन करने वाले पंकज अडवाणी को भी पद्म सम्मान से नवाजा जायेगा. संगीत के क्षेत्र में ये सम्मान शारदा सिन्हा को दिया  जायेगा जिन्होंने भोजपुरी जगत में एक अलग पहचान बनाई.

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