पीएम मोदी द्वारा लिया गया नोटबंदी का फैसला भले ही भ्रष्टाचार , कालेधन ,जालीनोट और आतंकवादी संगठनों तक पहुँचने वाली मदद पर लगाम लगाने के लिए लिया गया हो। लेकिन इस बात से भी इनकार नही किया जा सकता है की इस फैसले से देश भर में मजदूरों और किसानों बहुत ही बुरा असर पड़ा है। नोटबंदी के बाद जहाँ मजदूर को काम मिलने में दिक्कत आ रही है वही किसानों को भी तैयार फसल के सही दाम नहीं मिल पा रहे हैं। किसानों की इस समस्या ने अब आक्रोश का रूप ले लिया है। जिसकी वजह से किसान कहीं सड़कों पर अपनी फसल को फेंक रहे हैं तो कहीं किसान अपनी तैयार फसल पर ट्रैक्टर चला कर अपना विरोध जता रहे हैं।
किसानों ने खड़ी फ़सल पर चलाया ट्रैक्टर
- नोटबंदी से परेशान किसानों का सब्र का बांध अब टूटने लगा है।
- बता दें कि पंजाब में अमृतसर के मजीठा इलाके के नाग कलां गांव में एक किसान ने अपनी तैयार फसल पर खुद ट्रैक्टर चला दिया
- जिसका वजह इस किसान को फ़सल का वाजिब दाम ना मिलना है।
- सुखदीप सिंह नामक इस किसान ने फलियों की फसल उगाई थी।
- जिसमे कुल लागत 17 हज़ार रूपए की आई थी।
- लेकिन जब इस फसल को बचने की बारी आई तो सुखदीप को मुनाफा तो दूर लगाये गए पैसे भी नही मिल पा रहे थे।
- जिससे आहात होकर सुखबीर ने अपनी तैयार फसल पर ट्रैक्टर चला दिया।
- पंजाब के साथ ही छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भी नोटबंदी के चलते किसानों को हज़ारों का नुक्सान उठाना पड़ा है।
- मध्य प्रदेश के विदिशा के अमाछावर गांव में महेंद्र सिंह नाम के किसान ने मूली, टमाटर और गोभी की फसल लगाई थी.
- लेकिन बाज़ार से सही दाम न मिलने से परेशान होकर महेंद्र ने भी पूरे खेत में ट्रैक्टर चलवा दिया।
नोटबंदी से परेशान किसानों को ने सब्जियों को फ़ेंककर जाता विरोध
- नोटबंदी से परेशां किसानो ने न सिर्फ अपनी फसलों पर ट्रैक्टर चला कर अपना विरोध जताया।
- बल्कि वाजिब दाम न मिलने से उगाई गई सब्जियों को सड़क पर फ़ेंक क्र भी अपना विरोध प्रकट किया।
- बता दें की मध्य प्रदेश के उज्जैन में किसानों ने कई क्विंटल प्याज को सड़क पर फेंक दिया।
- इसका कारण ये है की जो प्याज़ किसानों से सरकार ने कुछ वक्त पहले छह रूपए किलो तक खरीदा था,
- वहीँ अब ये दाम पचास पैसे किलो तक आ गया है।
- जिससे किसानों को काफी नुकसान हो रहा है।
- MP के साथ साथ छत्तीसगढ़ के दुर्ग में भी किसानों ने 70 ट्रक टमाटर को सड़क पर फेंक दिया।
- इसका भी कारण ये था की टमाटर का दाम गिरकर एक रुपये प्रति किलो तक आ गया था।
- नोटबंदी के चलते देश के अन्नदाता कहे जाने वालों किसानों को अपनी ही मेहनत का दाम पाने के लिए दर दर भटकना पड़ रहा है।
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Mohammad Zahid
मैं @uttarpradesh.org का पत्रकार हूँ। तथ्यों को लिखने से मुझे कोई रोक नहीं सकता।नवाबों के शहर लखनऊ का हूँ इसलिए बुलंद आवाज़ भी उठाता हूँ तो बड़े एहतराम से....