विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़े उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के शक्ति प्रदर्शन के पहले मौके पर सभी अटकलों को दरकिनार कर शिवपाल सिंह यादव रथ यात्रा को हरी झण्डी दिखाने के लिए पहुंचे। मंच पर दाहिनी तरफ अखिलेश तो बाईं तरफ शिवपाल यादव बैठे थे। पहले शिवपाल ने मंच पर आकर माइक संभाला, इसके बाद अखिलेश और अन्त में मुलायम ने संबोधित किया।
- सार्वजनिक मंच से अखिलेश और शिवपाल दोनों एक दूसरे के कार्यक्रमों को सफल बनाने की अपील कर रहे हैं।
- लेकिन एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या वाकई जंग समाप्त हो गयी है।
- खींचतान के बाद पहली बार चाचा-भतीजा सार्वजनिक मंच पर साथ आए तो दोनों के बीच गर्मजोशी नहीं दिखाई दी।
- दोनों के हाव-भाव से ऐसा लग रहा था कि दोनों ही एक दूसरे से आमना-सामना नहीं करना चाहते।
- मंच से संबोधन में भी शिवपाल ने अखिलेश को रथ यात्रा की शुभकामनाएं दी।
- लेकिन अखिलेश ने अपने पूरे संबोधन ने शिवपाल का नाम तक नहीं लिया।
- मालूम हो कि पिछली बार जब अखिलेश-शिवपाल एक मंच पर आए थे तो दोनों के बीच झड़प की नौबत आ गई थी।
- उस वक्त शिवपाल ने मंच पर ही अखिलेश को झूठा बताते हुए उनके हाथ से माइक छीन लिया था।
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घमासान हुआ सियासीः
- पारिवारिक घमासान कुछ हद तक थमने के बाद चुनाव से पहले महागठबंधन बनाने की तैयारियां चल रही हैं।
- महागठबंधन बनाने की जिम्मेदारी शिवपाल यादव के कंधों पर है।
- इसके बाद शिवपाल ने तमाम दलों के नेताओं को 5 तारीख के कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता भेजा है।
- इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि समाजवादी कुनबे की रार अभी थमी नहीं है।
- बल्कि अब यह घमासान सियासी हो चला है।
- अखिलेश और शिवपाल दोनों ही अपने-अपने कार्यक्रमों को सफल बनाने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।
- इन कार्यक्रमों की कामयाबी का पैमाना ही तय करेगा कि सपा में किसका सिक्का चलता है।
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