यूं तो कल से ही बीआरडी मेडिकल कॉलेज की घोर लापरवाही (Dr. Kafil Khan) से 38 बच्चों की मौत को लेकर चारों ओर चर्चाएँ हो रही हैं। मगर इस बीच उसी अस्पताल के एक डाक्टर ने गुरुवार की रात को तमाम जद्दोजहद करते हुए बच्चों की जान बचाने की कोशिशें की थीं। उन्होंने ऑक्सीजन की कमी की जानकारी मिलते ही अपनी कार से ऑक्सीजन का तीन जंबो सिलेंडर लेकर बच्चों की मदद करने की कोशिश की थी।
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- गुरुवार की रात करीब दो बजे इंसेफेलाइटिस वार्ड के कर्मचारियों ने प्रभारी व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. काफिल खान को सूचना दी कि अगले एक घंटे बाद ऑक्सीजन खत्म हो जाएगी।
- इस सूचना के बाद ही डॉक्टर की नींद उड़ गई।
- वे अपनी कार से मित्र डॉक्टर के अस्पताल गए और वहां से ऑक्सीजन का तीन जंबो सिलेंडर लेकर शुक्रवार के तीन बजे सीधे बीआरडी पहुंचे।
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- तीन सिलेंडरों से बालरोग विभाग में करीब 15 मिनट ऑक्सीजन सप्लाई हो सकी।
- सुबह साढ़े सात बजे ऑक्सीजन खत्म होने पर एक बार फिर वार्ड में हालात बेकाबू होने लगे।
- उधर ऑक्सीजन सिलेंडर की खेप आने में करीब दो घंटे देर थी।
- ऐसे में डॉ. काफिल खान वार्ड में घूम-घूमकर मरीजों का इलाज कर रहे थे।
- साथ में जूनियर डॉक्टरों (Dr. Kafil Khan) को एम्बु बैग चलाने को निर्देशित भी किया।
- डॉ. काफिल खान ने ऑक्सीजन सिलेंडर की आवश्यकता भांप लिया था।
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- इस बीच उन्होंने जिले में आधा दर्जन ऑक्सीजन सप्लायरों से फोन पर बात भी की।
- मयूर गैसेज ऑक्सीजन सिलेंडरों को नकद भुगतान मिलने पर रिफिल करने को तैयार हो गया।
- डॉ. काफिल खान तुरंत एक कर्मचारी को एटीएम कार्ड देकर रुपये निकालने को भेजा।
- फैजाबाद से आए इम्पीरियल गैसेज कंपनी के ट्रक चालक को डीजल और दूसरे खर्च की रकम जेब से देकर खलीलाबाद भेजा।
- मयूर गैसेज संचालक जब सिलेंडरों को रिफिल करने से मुकरने लगे तब डॉ. काफिल खान ने पूरे मामले की जानकारी (Dr. Kafil Khan) प्रशासन के आलाधिकारियों को दी। हालांकि तब तक काफी देर हो गई थी।
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